Thyroid क्या है ओर किस तरह इसका ईलाज किया जा सकता है ?

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Thyroid क्या है ओर किस तरह इसका ईलाज किया जा सकता है ?

Thyroid तितली के समान एक छोटी सी (gland)ग्रंथि होती है जो गर्दन के आगे की तरफ(गले) नीचे की ओर होती है। ये जटिल जालो का एक हिस्सा होता है जिसे endocrine system कहते है। एंडोक्राइन सिस्टम शरीर की कई गतिविधियो के कोओर्डीनेशन के लिए जिम्मेदार होता है। थायरोइड ग्रंथि शरीर के metabolism को नियंत्रित करने वाले होर्मोन को बनाती है।

Thyroid जब बहुत ज्यादा होर्मोन(Hyperthyroidism) या अपर्याप्त होर्मोन(Hypothyroidism) पैदा करता है तो कई अलग अलग disorder उत्पन्न हो सकते है।

Thyroid

Thyroid के 4 सामान्य विकार होते है:

  • हाशिमोटों रोग
  • ग्रेव्स रोग
  • गोइटर
  • थायरोइड गांठ

Hyperthyroidism(हाइपरथायरोंडिज़्म)

अतिगलग्रंथिया मे थायरोइड ग्रंथि ज्यादा active होती है ये अपने होर्मोन का बहुत अधिक उत्पादन करता है. हाइपरथायरोइडीज़्म लगभग 1 प्रतिशत महिलाओ को affect करता है ये महिलाओ की तुलना मे पुरुषो मे कम है.

अतिगलग्रंथियता का सबसे सामान्य कारण ग्रेव्स रोग है जो overactive thyroid वाले लगभग 70 प्रतिशत लोगो को प्रभावित करता है.

Thyroid पर गाठ होना ये एक ऐसी स्थिति है जिसे विषालु गाठदार गोइटर या बहुकोशिकीय गोइटर कहा जाता है. ये ग्रंथि भी अपने हॉर्मोन्स के overproduce होने का कारण हो सकता है.

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अत्यधिक हॉर्मोन्स का production कई लक्षणो की वजह से हो सकते है जैसे की

  • बैचेनी
  • घबराहट
  • दिल का तेजी से धड़कना
  • पसीना आना
  • कपकपी होना
  • चिंता होना
  • नींद ना आना
  • त्वचा का पतला होना
  • बालो ओर नाखूनो का कमजोर हो जाना
  • मांसपेशियो मे कमजोरी आना
  • वजन घटना
  • उभरी हुई आंखे

हाइपरथायरोडिज़्म निदान ओर उपचार

Blood test रक्त मे थायरोइड होर्मोन(थायरोक्सिन या T4) और थायरोइड उत्तेजक होर्मोन(TSH)के level को मापता है। Pituitary ग्रंथि TSH को release करती है ताकि उसके होर्मोन के उत्पादन के लिए होर्मोन को उत्तेजित किया जा सके. high थायरोक्सिन ओर Low TSH लैवल इंडिकेट करते है की आपकी thyroid ग्रंथि overactive है।

डॉक्टर आपको मुह के जरिये या injection से रेडियोएक्टिव आयोडिन दे सकता है ओर ये measure कर सकता है की आपकी थायरोइड की ग्रंथि कितनी मात्रा मे है। बहुत ज्यादा radioactive iodine मे लेना इस बात का सिग्नल है की आपकी ग्रंथि अतिसक्रिय है।

हाइपरथायरोडिज़्म का treatment थायरोइड ग्रंथि को होर्मोन बनाने के लिए block कर देता है या इसे खत्म कर देता है।

  • Antithyroid ड्रग्स जैसे मेथिमाजोल(टेपाजोल) थायरोइड को सके उत्पादन से रोकती है।
  • रेडियोएक्टिव आयोडिन की बड़ी dose थायरोइड ग्रंथि को नुकसान पहुचाती है. इसे आप टेबलेट के रूप मे लेते है.
  • थायरोइड ग्रंथि को remove करने के लिए surgery का उपयोग किया जा सकता है.

यदि आपके पास radioactive iodine या सर्जरि है जो आपकी थायरोइड ग्रंथि को नष्ट करती है तो आपमे hypothyroidism विकसित होंगे ओर हर रोज थायरोइड होर्मोन लेने की जरूरत पड़ेगी।

Hypothyrodism(हाइपोथायरोडिज़्म)

हाइपोथायरोडिज़्म विपरीत होती है हाइपरथायरोडिज़्म से. थायरोइड ग्रंथि underactive होती है ओर ये अपने होर्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाती है।

हाइपोथायरोडिज़्म अक्सर हाशिमोटों रोग के कारण होती है ये संयुक्त राज्य अमेरिका मे 12 वर्ष ओर उससे अधिक उम्र के लगभग 4.6 प्रतिशत लोगो को प्रभावित करता है. हाइपोथायरोडिज़्म के ज़्यादातर मामले हल्के होते है.

होर्मोन का प्रॉडक्शन कम होना कुछ चीजो की ओर indicate करता है :

  • थकान
  • रूखी त्वचा
  • ठंड मे sensitivity ज्यादा होना
  • याददाश्त की समस्या होना
  • कब्ज
  • डिप्रेशन
  • वजन बढ़ना
  • कमजोरी
  • ह्रदय गति धीमी
  • कोमा

हाइपोथायरोडिज़्म निदान ओर उपचार

आपके TSH ओर थायरोइड होर्मोन के level को measure करने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट करवाएगा. High TSH का स्तर ओर Low thyroxin का स्तर का मतलब होता है की आपका थायरोइड underactive है.

ये स्तर ये भी सिग्नल दे सकते है की पिट्यूरी ग्रंथि अपने होर्मोन बनाने के लिए thyroid ग्रंथि को उत्तेजित करने की कोशिश करने के लिए अधिक TSH release करती है

हाइपोथायरोडिज़्म का मुख्य उपचार है थायरोइड की tablets लेना. खुराक को proper तरीके से लेना महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुत ज्यादा थायरोइड होर्मोन लेने से Hyperthyrodism के लक्षण हो सकते है.

Hashimoto(हाशिमोटो)

इस बीमारी को chronic lymphocytic थायरोयडीटीस के नाम से जाना जाता है. ये United state में हायपोथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है जो लगभग 1 करोड़ 40 लाख लोगो को प्रभावित करता है.

ये किसी भी age में हो सकता है लेकिन medium age की उम्र वाली महिलाओ में ये सबसे आम है  ये बीमारी तब होती है  इम्यून सिस्टम गलती से attack करता है और धीरे धीरे thyroid ग्रंथि और होर्मोन के उत्पादन की ability को खत्म कर देती है.

Hashimoto

हाशिमोटो बीमारी के light cases वाले लोगो में कोई भी symptoms स्पष्ट दिखाई नहीं देते है. रोग कई वर्षो तक स्टेबल रहता है और लक्षण अक्सर कोमल रहते है लक्षणों में शामिल है जैसे की:

  • थकान
  • डिप्रेशन
  • कब्ज
  • हल्का वजन
  • रूखी त्वचा
  • सूखे और पतले बाल
  • चेहरा फूला हुआ और पीला हो जाना
  • भारी और अनियमित मासिक धर्म
  • ठण्ड बर्दाश्त न होना
  • थायरोइड बढ़ जाना या गोइटर

हशिमोटो का निदान और उपचार

अक्सर किसी भी प्रकार के थायरोइड विकार के लिए स्क्रीनिंग करते समय TSH स्तर का परिक्षण पहला कदम होता है. यदि आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में सकुच अन उभाव करते है तो आपके तश के बढे हुए स्तर और थायरोइड होर्मोन के निम्न स्तर (T3 या T4) की जांच के लिए blood test  भी हो सकता है.

हशिमोटो एक autoimmune disorder  है जिससे आपको ब्लड में ऐसे असामान्य एंटीबाडी भी दिखाई देंगे जो थायरोइड पर हमला कर सकते है.

हाशिमोटो बीमारी का कोई ज्ञात इलाज नहीं है. होर्मोन रिप्लेसमेंट दावा का उपयोग अक्सर  थायरोइड होर्मोन का स्तर या TSH के निम्न स्तर को बढाने के लिए किया जाता है. ये रोग लक्षणों को दूर करने में भी मदद कर सकता है.

Rare केस में थाइरोइड ग्रंथि के भाग को या पूरे को हटाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है. इस बिमारी का starting period   वक्त में ही हो जाती है क्योंकि ये सालो तक स्थिर रहती है और धीरे धीरे बढती है.

Graves Disease(क्रब रोग)

ग्रेव्स रोग का नाम उस डॉक्टर पर रखा गया है जिसने 150 साल से अधिक समय पहले इसका वर्णन किया था.

graves ऑटो इम्यून विकार है ये तब होता है जब शरीर का इम्यून सिस्टम थायरोइड ग्रंथि पर strike करता है.

ये बीमारी genetic होती है जो पुरुषो और महिलाओ में किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन Department Of Health And Human Service के अनुसार ये 20 से 30 वर्ष की महिलाओ में नार्मल है. अन्य रिस्क फ़ैक्टर्स में depression, pregnancy और cigrate शामिल है.

जब blood flow में थायरोइड होर्मोन का लेवल हाई रहता है तो शरीर के सिस्टम गति करते है तो ऐसे लक्षण दिखाई देते है तो हाइपरथायरोडिज्म के लिए आम है जिनमे ये शामिल है :

  • चिंता
  • चिडचिडापन
  • थकान
  • हाथ कांपना
  • दिल की धड़कन का बढ़ना
  • बहुत ज्यादा पसीना आना
  • सोने में कठिनाई होना
  • दस्त या लगातार पेशाब आना
  • गोइटर
  • उभरी हुई आँखे और vision की समस्या

ग्रेव्स रोग का निदान और उपचार

एक normal physical exam में बढ़ा हुआ थायरोयड, उभरी हुई आँखे, बढ़ी हुई हउई नाड़ी, बढ़ा हुआ मेटाबोलिज्म और हाई ब्लड प्रेशर जैसे संकेत दिख सकते है. TSH के उच्च और निम्न स्तर के लिए ब्लड टेस्ट होता है. ये दोनों ग्रेव्स रोग के संकेत है.

प्रतिरक्षा प्रणाली को थायरोयड ग्रंथि पर हमला करने से रोकने के लिए कोई उपचार नहीं है और इसके कारण होर्मोन को overproduce किया जा सकता है. ग्रेव्स के लक्षणों को कई तरीको से control किया जा सकता है जैसे :

  • Beta blockers तेज ह्रदय गति, चिंता व पसीने को नियंत्रित करता है.
  • थायरोयड को होरमोन की अधिक मात्रा में उत्पादन से रोकने के लिए antithyroid दवाए.
  • Radioactive iodine आपके थायरोयड के भाग को नष्ट करने के लिए.
  • थायरोयड ग्रंथि को हटाने के लिए surgery होती है जो एक permanent आप्शन है अगर आपसे एंटीथायरोयद ड्रग और रेडियोएक्टिव आयोडीन tolerate नहीं होता है तो.

Goiter(गोइटर)

गोइटर थायरोयड ग्रंथि की noncancerous वृद्धि है. whole world मे  गोइटर का सबसे आम कारण है डाइट में आयोडीन की कमी है. Researcher के अनुसार दुनियाभर में 800 मिलियन लोगो में से 200 मिलियन लोगो को गोइटर रोग प्रभावित करता है.

गोइटर किसी भी age में किसी को भी affect कर सकता है. specially दुनिया के उन areas में जहाँ आयोडीन से भरपूर खाद्य पदार्थ बहुत कम सप्लाई होते है. 40 की उम्र के बाद goiter womens में आम है जिनके थायरोयड डिसऑर्डर होने की अधिक possibilities है. इसमें कुछ risk factor include है जैसे की पारिवारिक चिकित्सा इतिहास, कुछ दवाओ का उपयोग, गर्भावस्था व विकिरण जोखिम शामिल है.

यदि गोइटर serious नहीं है तो कोई लक्षण नहीं हो सकता और अगर ये आकार के आधार पर बढ़ता है तो इनमे कई लक्षण शामिल है:

  • गर्दन में अकदन या सूजन आना.
  • सांस लेने या निगलने में कठिनाई.
  • खांसी या घरघराहट.
  • आवाज में कर्कश्पन आना.

गोइटर का निदान और उपचार

इसमें आपके checkup के दौरान डॉक्टर आपकी गर्दन के एरिया को और उस टेस्ट के दौरान आपने कुछ निगला है या नहीं, ये महसूस करेगा. ब्लड टेस्ट से आपके रक्त प्रवाह में थायरोयड होर्मोन, TSH और एंटीबाडी के level का पता चलेगा.

ये thyroid disorder का निदान करेगा जो goiter का कारण बनता है. थायरोयड के ultrasound से सूजन या गाँठ के लिए चेक कर सकते है.

गोइटर का treatment तभी किया जाता है जब ये symptoms पैदा करने के लिए major हो जाती है. अगर ये iodine की कमी से हुआ है तो आप आयोडीन की dose ले सकते है. रेडियोएक्टिव आयोडीन थायरोयड ग्रंथि को सिकुड़ सकता है. सर्जरी से gland के parts को हटा दिया जाता है. उपचार आमतौर पर overlap होता है क्योंकि गोइटर अक्सर हाइपरथायरायडिज्म का लक्षण होता है.

गोइटर अक्सर extra treatment लायक थायरोयड डिसओर्डेर्स से जुड़े होते है जैसे की ग्रेव्स रोग. गोइटर चिंता का कारण नहीं होते है. लेकिन उन्हें अनुपचारित तरीके से छोड़ दिया जाए तो ये गंभीर जटिलताये पैदा कर सकते है जिनमे शामिल है सांस लेने में समस्या होना और सूजन रहना.

थायरोइड की गाँठ(Nodule)

ये एक बढ़ने वाली फॉर्म है थायरोइड ग्रंथि पर या उसके अंदर बनती है. ये आयोडिनयुक्त countries मे रहने वाले 1% पुरुष व 5% महिलाओ मे होती है.

कारण हमेशा ज्ञात नहीं होंते है लेकिन इनमे आयोडिन की कमी ओर हाशिमोटों रोग शामिल हो सकती है. ये tough या पानी से भरी हो सकती है.

अन्य थायरोइड समस्या के साथ पुरुषो की तुलना मे महिलाओ nodules(गाँठ) बहुत आम है. दोनों ही genders मे जोखिम उम्र के साथ साथ बढ़ता है.

अधिकांश thyrodal किसी भी लक्षण का कारण नहीं होते है. अगर ये बढ़ जाते है तो गर्दन मे swelling पैदा कर सकते है। सांस लेने ओर निगलने मे कठिनाई होना। दर्द ओर गोइटर पैदा कर सकते है.

कुछ नोड्यूल थायरोइड होर्मोन का उत्पादन करते है जिससे ब्लडस्ट्रीम मे abnormally हाइ लेवल होता है। जब ऐसा होता है तो हाइपरथायरोइडीज़्म जेसे लक्षण होते है. जिसमे कुछ शामिल है

  • पल्स रेट ज्यादा होना.
  • घबराहट.
  • भूख बढ़ना.
  • वजन घटना.
  • चिपचिपी त्वचा.

Other side अगर नोड्यूल हाशिमोटों रोग से जुड़े है तो लक्षण हाइपोथायरोडिज़्म समान दिखाई देते है.

  • थकान.
  • वजन बढ़ना.
  • बाल झड़ना.
  • रूखी त्वचा.
  • ठंड बर्दाश्त न होना.

थायरोइड गाँठ का निदान और उपचार.

सामान्य physical exam से अधिकांश नोड्यूल का पता लगाया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड, CT scan या MRI के दौरान भी इंका पता लगाया जा सकता है.

अन्य प्रक्रियाए

TSH टेस्ट और थायरोइड स्कैन से हाइपरथाइरोइडीज़्म का पता लगाया जा सकता है.

Good thyroid से जीवन को खतरा नहीं होता है इनपर आमतौर पर उपचार की आवश्यकता नहीं होती है. अगर ये समय के साथ increase नहीं होता है तो इसके लिए कुछ नहीं किया जाता है.

कैंसर नोड्यूल बहुत दुर्लभ होते है.

National Cancer Institute के अनुसार थायरोइड कैंसर 4% से कम आबादी को प्रभावित करता है. Doctors द्वारा सुजाए गए उपचार ट्यूमर के प्रकार के आधार पर अलग अलग होंग. surgery के माध्यम से थाइरोइड को remove करना ज्यादा सही उपचार है. यदि body के अन्य भागो मे कैंसर फैलता है तो chemotherapy की आवश्यकता होती है.

थायरोइड के dysfunction को रोकना

ज्यादातर मामलो मे हाइपरथायरोडिज़्म या हायपोथायरोडिज़्म को नहीं रोक सकते है. Developing countries मे हायपोथायरोडिज़्म आयोडिन की कमी के कारण होता है.

हाइपरथायरोडिज़्म अक्सर graves रोग के कारण होता है। ये एक autoimmune बीमारी है जो रोकथाम योग्य नहीं है। बहुत अधिक थायरोइड होर्मोन लेकर एक अतिसक्रीय थायरोइड को बंद कर सकते है. यदि आपको prescribed किया गया है तो सही खुराक लेना सुनिश्चित करे.

अगर आप थायरोइड बीमारी को रोकने मे capable नहीं है तो इसके बारे मे डॉक्टर को जानकारी दे ओर डॉक्टर द्वारा बताई गयी दावा को ले जिससे इस बीमारी की जटिलताओ को रोक सकते है.

Acchi Sehat
hey, this is ikram hussain. He has a very deep intrest in Health and Fitness topics.

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